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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

 

    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं भारत सरकार की योजना ह जिसका उदेदश्य महिलाओं के प्रति लोगों को संवेदनशील और जागरुक बनाना तथा उनके लिए किए जा रहे विकास कार्यो में तेज़ी लाना है .  इस योजना का प्रारम्भ 100 करोड़ की आरम्भिक धनराशी से किया गया था.

    जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 में भारत में (0-6 वर्ष के) बच्चों का लिंग अनुपात 927 लüडकियों पर 1000 लड़कों का था, जो 2011 में तेज़ी से गिरकर 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों का हो गया. यूनिसेफ ने 2012 की अपनी रिपोर्ट में 195 देशों में से भारत को 41वां स्थान पर रखा है.

    लड़कियों की घटती संख्या और गिरते लिंग अनुपात को ध्यान में रखते हुए ही अक्टूबर 2014 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना आरंभ की गई. इसे राष्ट्रीय आभियान के द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा ह तथा सभी राज्यों और केंद्र शसित प्रदेशों के 100 चुनिंदा जिलों में जहालिंग अनुपात बहुत कम ह में बहुआयामी कार्यक्रम चलाने का लक्ष्य रखा गया है .  यह महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय का संयुक्त प्रयास है.

    विश्व बेटी दिवस पर बोलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने, भ्रूण हत्या को समाप्त करने का संकल्प लेने का आवाह्न किया और MyGov.in पोर्टल पर 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर भारतीय नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने और सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया.

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत, हरियाणा से इस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया.

    चूंकि बेटियों को बचाने, उन्हें सुरक्षित रखने तथा उन्हें सशक्त बनाने के लिए समग्र और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता थी, अत: सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की घोषणा की.

    सशस्त्र सीमा बल भारत-नेपाल, भारत-भूटान सीमा, एल डब्ल्यू ई क्षेत्र तथा जम्मू और कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा डयूटी पर तनात है. आधिकांश तनाती के स्थान बहुत दूर हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न आधारभूत और संचार सुविधओं का अभाव है. अत: महनिदेशक एस.एस.बी. ने स्वेच्छा से ग्रामीण जनता को विभिन्न जन चेतना कार्यक्रम, व्यिक्तगत संपर् और बठकों के माध्यम से शिक्षित करने का बीड़ा उठाया. लड़कियों और महिलाओ को आधिक वरीयता दी जा रही ह तथा उन्हें सशक्त बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है. प्रारम्भ में स्कूलों को गोद लिया जा रहा ह तथा सह-शिक्षा के विद्यालयों में लड़कियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है. एस.एस.बी. के सभी फ्रंटीयर इस मिशन पर पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं. चिकित्सा जन चेतना आभियान में एस.एस.बी. के डाक्टर महिलाओं से बात कर, उन्हें स्वयं के स्वास्थ्य, स्वच्छता व सफाई के बारे में जानकारी देते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित चिकित्सा जाच शिविर लगाए जा रहे हैं. लड़कियों के लिए विशेष शक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. विभिन्न प्रकार के व्यवसयिक प्रशिक्षण जसे:- ब्यूटीशियन, कुकरी बेकरी, सिलाई, कम्प्यूटर शिक्षा आदि के माध्यम से लड़कियों को सक्षम बनाया जा रहा है.



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