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एस.एस.बी. का वेटेनरी विंग

 

  प्रस्तावना

  एस.एस.बी. के वेटेनरी विंग की शुरुआत 1989 में सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले गरीब से गरीब व्यक्ति को पशु चिकित्सा पहुँचाने तथा युवाओं व किसानों में वज्ञनिक पशु हसबैंडरी के विषय में जानकारी प्रदान करने के उेश्य से की गई.

    वेटेनरी सिविक कार्यक्रम ने सबसे निचले स्तर के लोगों का विश्वास जीतने में एस.एस.बी. की सहायता की है जिससे हमें कई बहुमूल्य व उपयोगी आसूचना संबंधी जानकारी प्राप्त हो सकी .

    सीमा रक्षक बल के रुप में गृह मंत्रालय में आने के बाद, एस.एस.बी. का वेटेनरी विंग श्वान, प्रशिक्षण, ब्रीडिंग, सीमा रक्षक बलों की सहायता के लिए पशु परिवहन की सुविधा प्रदान करने तथा प्रबोध प्रबंधन गतिविधि/कार्यक्रमों के अंतर्गत वेटेनरी सिविक कार्यक्रम चलाने का काम कर रहा है .

 

एस.एस.बी. में वेटेनरी विंग की भूमिका

1.   डॉग स्काड/ए टी यूनिट/राइडिंग हार्स यूनिट का अनुरक्षण .

2.   ग स्काड/एनिमल ट्रांसपोर्ट/राइडिंग हार्स यूनिट संबंधी प्रशिक्षण .

3.   स्वयं की तथा अन्य केन्द्रीय पुलिस बल व राज्य पुलिस की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के   लिए  श्वान की ब्रीडिंग .

4.   बल के पशुओं की देखभाल व अनुरक्षण .

5.   भारत-नेपाल सीमा तथा भारत-भूटान सीमा पर सीमावर्ती गांवों में वेटेनरी सिविक कार्यक्रम  चलाना.



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